नॉर्वे में पत्रकार के तीखे सवाल: भारत ने दिया कड़क जवाब

MEA Secretary C.B. George responding to a journalist in Oslo during a press conference.

नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) और एक विदेशी पत्रकार के बीच मानवाधिकारों (Human Rights) और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान हुए इस वाकये में भारतीय अधिकारियों ने भारत की वैश्विक छवि और मानवता के प्रति योगदान का हवाला देते हुए कड़ा रुख अपनाया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी बहस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास स्टोर की मुलाकात के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब नॉर्वेजियन पत्रकार हेला लेंग ने भारत में मानवाधिकारों की स्थिति पर सवाल उठाए। लेंग ने पूछा कि भारत और नॉर्वे की साझेदारी के बीच दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे? उन्होंने यह भी सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी मुश्किल सवालों का सामना कब करना शुरू करेंगे।

भारत का जवाब: 'भरोसा क्या होता है'

पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने भारत को 5,000 साल पुरानी महान सभ्यता बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को 'जीरो' और 'योग' दिया है। उन्होंने 'भरोसे' को परिभाषित करते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब भारत ने 150 से अधिक देशों को वैक्सीन और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराईं। जॉर्ज ने जोर देकर कहा कि दुनिया ने उस समय भारत पर विश्वास जताया और संकट से उबरने में मदद ली, यही असली भरोसा है।

पत्रकार का रुख और प्रेस फ्रीडम

रिपोर्ट के अनुसार, जब सीबी जॉर्ज जवाब दे रहे थे, तब पत्रकार हेला लेंग बीच में ही उठकर चली गईं। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का हवाला दिया, जिसमें नॉर्वे पहले और भारत 157वें स्थान पर है। उन्होंने लिखा कि सत्ता से सवाल करना पत्रकार का काम है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस घटना को लेकर भारत में भी विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि जब कुछ छिपाने के लिए नहीं होता, तो डरने की भी जरूरत नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंच पर सवालों से बचते हैं, तो इससे भारत की छवि पर क्या असर पड़ता है?

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