खाद संकट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी कीमतें, सप्लाई घटी

Fertilizer bags and industrial ammonia supply representing the global shortage and price hike.

दुनिया भर में जारी संघर्षों और बदलती वैश्विक स्थितियों के कारण भारत के सामने खाद का संकट गहराता नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया और अमोनिया की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी जा रही है, जबकि मांग के मुकाबले सप्लाई आधी भी नहीं रह गई है।

मांग के मुकाबले आधी भी नहीं मिली बोलियां
बिजनेस स्टैंडर्ड और सीआरयू ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन पोटाश लिमिटेड ने हाल ही में 5,21,000 टन अमोनिया के लिए टेंडर जारी किया था। हालांकि, खतरे की घंटी तब बजी जब सप्लायरों की ओर से केवल 2,39,000 टन के लिए ही बोलियां आईं। यह स्थिति दर्शाती है कि ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है और उपलब्धता को लेकर बड़े प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, भारत के पश्चिमी तट के लिए 1,51,000 टन अमोनिया की जरूरत थी, लेकिन सिर्फ 1,01,000 टन का ऑफर मिला। वहीं पूर्वी तट की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 3,70,000 टन की मांग के मुकाबले महज 1,38,000 टन अमोनिया ही ऑफर किया गया है।

यूरिया और अमोनिया के दामों में भारी उछाल
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने खाद की कीमतों में आग लगा दी है। युद्ध से पहले यूरिया की कीमत जो 510 डॉलर प्रति टन थी, वह अब बढ़कर करीब 950 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। इसी तरह, अमोनिया के दाम भी 500 डॉलर से बढ़कर 900 डॉलर प्रति टन के स्तर को छू रहे हैं। हालांकि सल्फर की कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो 800 डॉलर से 500 डॉलर प्रति टन के स्तर पर आई हैं।

भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी खाद जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात (Import) पर निर्भर है। अमोनिया नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है और किसान इसका उपयोग उत्पादन बढ़ाने के लिए करते हैं। यदि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में ऐसी ही बाधा बनी रहती है, तो इसका सीधा असर घरेलू खाद की कीमतों और कृषि सप्लाई पर पड़ेगा।

इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों से खाद की खपत कम करने और 'नैनो यूरिया' का अधिक उपयोग करने की अपील की है। सरकार का प्रयास है कि वैकल्पिक संसाधनों के जरिए विदेशी आयात पर निर्भरता को कम किया जाए।

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