देश में सबसे असुरक्षित राज्य
NCRB की 'क्राइम इन इंडिया 2024' रिपोर्ट के मुताबिक, बीते एक साल में मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ कुल 5,875 मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पूरे भारत में सर्वाधिक है, जो राज्य को बुजुर्गों के लिए सबसे असुरक्षित स्थान बनाती है। प्रशासन और पुलिस की विशेष मॉनिटरिंग के दावों के बावजूद, यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में और अधिक भयावह होता जा रहा है।
हिंसा और यौन अपराधों का ग्राफ
राज्य में बुजुर्गों के साथ होने वाले अपराध केवल चोरी या संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं हैं। आंकड़ों के अनुसार, एक साल के भीतर 144 बुजुर्गों की हत्या कर दी गई और 376 मामलों में उन्हें गंभीर चोटें पहुंचाई गईं। महिलाओं की स्थिति और भी चिंताजनक है; रिपोर्ट में वरिष्ठ महिलाओं के साथ बलात्कार के 23 और छेड़छाड़ के 17 मामले दर्ज किए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि लोकलाज के डर से कई मामले तो पुलिस तक पहुँच ही नहीं पाते।
धोखाधड़ी और 'डिजिटल अरेस्ट' का खतरा
अकेलेपन और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण अपराधी अब बुजुर्गों को 'सॉफ्ट टारगेट' बना रहे हैं। पेंशन फ्रॉड और संपत्ति कब्जाने के पुराने तरीकों के साथ-साथ अब 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर अपराधों के जरिए उन्हें शिकार बनाया जा रहा है। पुलिस विभाग के अनुसार, कई मामलों में अपराधी बाहरी व्यक्ति न होकर परिवार के करीबी या परिचित ही निकलते हैं, जो बुजुर्गों की शारीरिक कमजोरी और सामाजिक अलगाव का फायदा उठाते हैं।
न्याय की धीमी रफ्तार
बढ़ते अपराधों के बीच कानूनी प्रक्रिया की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में राज्य में बुजुर्गों के खिलाफ हुए अपराधों के कुल 6,469 मामले अदालतों में लंबित (Pending) हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सजा की दर में सुधार नहीं होता और परिचितों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर लगाम नहीं लगती, तब तक वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्थितियां बदलना कठिन है।
