अमेरिका-ईरान शांति समझौता: होर्मुज खुलेगा, सस्ता होगा तेल

Ships passing through the Strait of Hormuz with US and Iran flags representing the peace agreement.

अमेरिका-ईरान शांति समझौता (US-Iran Peace Deal) : वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। जेनेवा में होने वाले इस ऐतिहासिक समझौते के बाद होर्मुज की खाड़ी व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खुल जाएगी, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी कमी आने की प्रबल संभावना है।

जेनेवा में होगा ऐतिहासिक समझौता

लंबे तनाव के बाद, पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान शांति समझौते (MoU) पर पहुंच गए हैं। इस समझौते के तहत ईरान की विदेशों में रुकी हुई संपत्ति (करीब 300 अरब डॉलर) वापस की जाएगी, सभी आर्थिक पाबंदियां हटेंगी और ईरान को बिना रोकटोक तेल बेचने की अनुमति मिलेगी। हालांकि, परमाणु मुद्दे और पाबंदियों को पूरी तरह हटाने पर अगले 60 दिनों के भीतर अलग से विस्तार से बातचीत की जाएगी।

होर्मुज की खाड़ी और नई शर्तें

समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का फिर से खुलना है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ईरानी अधिकारियों ने साफ किया है कि अब होर्मुज से गुजरना पूरी तरह 'फ्री' नहीं रहेगा। तटीय देश होने के नाते ईरान अब वहां से गुजरने वाले जहाजों से नेविगेशन, बीमा और पर्यावरण सुरक्षा जैसी सेवाओं के बदले शुल्क (Service Fee) वसूलेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील को 'बेहतरीन समझौता' बताते हुए कहा कि अब तेल की आवाजाही निर्बाध रूप से शुरू हो सकेगी।

लेबनान और क्षेत्रीय शांति

इस MoU में 'लेबनान' शब्द का तीन बार जिक्र किया गया है। समझौते की शर्तों के अनुसार, लेबनान में जारी जंग को पूरी तरह और स्थायी रूप से बंद किया जाएगा और उसकी संप्रभुता का सम्मान होगा। हालांकि, इजरायल ने इस समझौते पर कुछ आपत्तियां जताई हैं और वहां के सैन्य अभियानों को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है।

भारत पर क्या होगा असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे वैश्विक शांति और व्यापार की आजादी के लिए अहम बताया है। भारत के लिए इसके कई बड़े फायदे हैं:
  • सस्ता कच्चा तेल: भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी तेल आयात करता है। आपूर्ति सामान्य होने से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम गिर सकते हैं। 
  • भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले करीब एक करोड़ भारतीय श्रमिकों और वहां फंसे नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। 
  • रणनीतिक निवेश: ईरान में भारत की चाबहार बंदरगाह योजना और इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कोरिडोर (INSTC) को फिर से रफ्तार मिलेगी। 

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतें घटने से न केवल भारत बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत मिलेगी, जिससे वैश्विक महंगाई कम होने की उम्मीद है। 
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