ब्रिक्स इंदौर घोषणापत्र (BRICS Indore Declaration) के तहत जून 2026 में आयोजित कृषि मंत्रियों की बैठक में चार नए नेटवर्क लॉन्च किए गए हैं। इस ऐतिहासिक पहल का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर 'डिजिटल एग्रीकल्चर' और 'पुनर्योजी कृषि' (Regenerative Agriculture) को बढ़ावा देकर खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।
टिकाऊ खेती के लिए बड़ा वैश्विक कदम
भारत की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश के इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से 'इंदौर घोषणापत्र' को स्वीकार किया। यह घोषणापत्र भविष्य की खेती को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का एक ठोस रोडमैप पेश करता है। इसका सीधा फोकस छोटे किसानों की आय बढ़ाने और प्रयोगशाला के अनुसंधान को सीधे खेतों तक पहुँचाने पर है।
लॉन्च किए गए 4 नए कृषि नेटवर्क
बैठक के दौरान कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए निम्नलिखित चार संस्थागत ढाँचे (नेटवर्क) शुरू किए गए हैं:
- डिजिटल कृषि नेटवर्क: इसके तहत ब्रिक्स देशों के बीच कृषि डेटा, मौसम के पूर्वानुमान और एआई (AI) आधारित तकनीकों को साझा किया जाएगा।
- कृषि पारिस्थितिकी और पुनर्योजी कृषि नेटवर्क: यह नेटवर्क मिट्टी की सेहत सुधारने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए एक 'उत्कृष्टता केंद्र' के रूप में काम करेगा।
- बीज प्रणालियों में किसान अधिकारों पर वैश्विक मंच: इसके जरिए पारंपरिक बीजों की किस्मों का संरक्षण किया जाएगा और किसानों के अधिकारों की रक्षा होगी।
- एग्री-इनपुट, जेनेटिक संसाधन और सूचना नेटवर्क (BRICS AgriN): यह नेटवर्क सदस्य देशों के बीच खाद, बीज और आनुवंशिक संसाधनों के सुगम आदान-प्रदान को सुनिश्चित करेगा।
वैश्विक कृषि और किसानों पर प्रभाव
इन नेटवर्कों के संचालन में भारत को एक मुख्य समन्वयक (Coordinating) की भूमिका दी गई है। इस पहल से जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। डिजिटल तकनीकों के आने से किसानों को बाजार की सटीक जानकारी मिलेगी, जिससे उनकी लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा। यह घोषणापत्र वैश्विक खाद्य संकट से निपटने में एक मील का पत्थर साबित होगा।