UNHRC में भारत का प्रहार: 'PoK में रोटी मांगने वालों को मिलीं गोलियां'

India's representative Anupama Singh speaking at the UNHRC session against Pakistan's propaganda.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC में भारत-पाकिस्तान) के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकार उल्लंघन और नागरिकों के दमन का मुद्दा उठाते हुए स्पष्ट किया कि वहां बुनियादी अधिकारों की मांग करने वालों का सामना गोलियों और बर्बरता से किया जा रहा है।

POK में दमन और हिंसा पर चिंता

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने परिषद के 62वें सत्र में पाकिस्तान की बखिया उधेड़ते हुए कहा कि पीओके में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। उन्होंने हाल ही में रावलकोट में हुई त्रासदी का जिक्र किया, जहाँ 14 जून को सुरक्षा बलों ने बुनियादी अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर गोलियां चलाईं। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान दशकों से सैन्य अतिक्रमण और जनसांख्यिकीय हेरफेर के जरिए इस क्षेत्र में दमनकारी व्यवस्था बनाए हुए है।

जम्मू-कश्मीर पर भारत का अडिग रुख

पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे को बार-बार उठाने पर भारत ने दो टूक जवाब दिया। अनुपमा सिंह ने दोहराया कि संपूर्ण जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एकमात्र अनसुलझा मुद्दा भारतीय क्षेत्रों पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है और उसे इन क्षेत्रों को तुरंत खाली कर देना चाहिए।

OIC और पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को जवाब

भारत ने 'इस्लामिक सहयोग संगठन' (OIC) द्वारा जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में की गई टिप्पणियों को भी सिरे से खारिज कर दिया। भारत का कहना है कि पाकिस्तान अपनी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को दिए जा रहे निरंतर समर्थन से वैश्विक ध्यान भटकाने के लिए इस अंतरराष्ट्रीय मंच और ओआईसी कोऑर्डिनेटर की भूमिका का दुरुपयोग कर रहा है।

सिंधु जल संधि पर सख्त टिप्पणी

परिषद में भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भी पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई। भारत ने इसे वर्तमान परिस्थितियों में 'पुरानी' संधि करार देते हुए कहा कि जो देश आतंकवाद को प्रायोजित करता है, वह मित्रता और सहयोग के लाभ की उम्मीद नहीं रख सकता। भारत ने साफ किया कि पाकिस्तान की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उसके मानवाधिकार उल्लंघन के रिकॉर्ड को देखना चाहिए।
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