लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सड़क निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए नए टेंडर्स के लिए 'GRIHA' ग्रीन रोड सर्टिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया है। जून 2026 से लागू होने वाले इस फैसले के बाद अब ठेकेदारों को अनिवार्य रूप से पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ मानकों का पालन करना होगा।
सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर कदम
PWD और IIT इंदौर के बीच 'सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर' को लेकर हुए एमओयू (MoU) के बाद प्रमुख अभियंता कार्यालय ने यह नया तकनीकी सर्कुलर जारी किया है। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे के निर्माण में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है। जून 2026 के बाद जारी होने वाले सड़क निर्माण और हाईवे चौड़ीकरण के सभी नए प्रोजेक्ट्स में 'GRIHA' (Green Rating for Integrated Habitat Assessment) मानकों को पूरा करना अब टेंडर की प्राथमिक शर्त होगी।
पारंपरिक निर्माण सामग्री में बदलाव
इस नए नियम के लागू होने से सड़क निर्माण की पारंपरिक पद्धति में व्यापक बदलाव आएगा। अब बड़े सिविल और रोड कंस्ट्रक्शन वेंडर्स को पारंपरिक कोल-तार और बिटुमेन के स्थान पर अनिवार्य रूप से सस्टेनेबल और रीसाइकल्ड (पुनर्चक्रित) मैटेरियल का उपयोग करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि टेंडर जीतने के लिए आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग करना अनिवार्य होगा।
वेंडर्स और सप्लाई चेन पर असर
इस नीतिगत बदलाव का सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के वेंडर्स पर पड़ेगा। सरकारी आदेश के अनुसार, सभी क्लाइंट्स और ठेकेदारों को अपनी मटीरियल सप्लाई चेन को तुरंत अपग्रेड करने की आवश्यकता है। विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अब ग्रीन कंप्लायंस (Green Compliance) के बिना सरकारी भुगतान (Payments) क्लियर नहीं किए जाएंगे। इस पहल से न केवल सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी।