मध्यप्रदेश के भोपाल-मंडीदीप बेल्ट में अनाज भंडारण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट साइलो (Smart Silo) प्रोजेक्ट की सुगबुगाहट तेज हो गई है। नए एग्रो-लॉजिस्टिक्स इंसेंटिव के लागू होते ही निजी डेवलपर्स ने अपने पुराने गोदामों को डिजिटल रूप देने के लिए MPIDC को प्रारंभिक प्रस्ताव भेजने शुरू कर दिए हैं।
पुराने गोदामों का होगा कायाकल्प
राज्य सरकार द्वारा हाल ही में घोषित 'स्मार्ट साइलो और एग्रो-लॉजिस्टिक्स इंसेंटिव' के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। भोपाल और इंदौर के आसपास सक्रिय निजी वेयरहाउस डेवलपर्स ने अपने पारंपरिक गोदामों को आधुनिक सेंसर-बेस्ड साइलो में बदलने के लिए "एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट" (EOI) जमा करना शुरू कर दिया है। यह कदम राज्य के कृषि-रसद बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
B2B क्षेत्र में बढ़ेंगी अवसर की संभावनाएं
इस प्रशासनिक सक्रियता का सीधा असर बाजार पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 30 दिनों के भीतर इंडस्ट्रियल कोटिंग, सेंसर मैन्युफैक्चरर्स और सिविल ऑटोमेशन वेंडर्स के लिए बी2बी (B2B) ऑर्डर्स की बाढ़ आने वाली है। स्मार्ट साइलो के निर्माण में लगने वाली अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों की बढ़ती मांग से स्थानीय तकनीकी वेंडर्स को बड़े व्यावसायिक अवसर प्राप्त होंगे।
देरी करने वाले मालिकों के लिए बढ़ेगा जोखिम
वे वेयरहाउस मालिक जो अपग्रेडेशन की इस प्रक्रिया में देरी करेंगे, उनके लिए भविष्य में 'कमर्शियल रिस्क' बढ़ सकता है। सूत्र बताते हैं कि अनाज भंडारण के लिए जारी होने वाले भविष्य के सभी सरकारी टेंडर पूरी तरह से 'डिजिटल कंप्लायंस' और आधुनिक तकनीकी मानकों पर आधारित होंगे। ऐसे में बिना तकनीकी सुधार के पुराने गोदामों के लिए सरकारी अनुबंध हासिल करना कठिन हो जाएगा।
इस पहल से न केवल अनाज की बर्बादी कम होगी, बल्कि मध्यप्रदेश के एग्रो-लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निजी निवेश को भी नई ऊर्जा मिलेगी।