- एक्सटर्नमेंट ऑर्डर रद्द: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महाराष्ट्र महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ जारी एक साल के तड़ीपार (एक्सटर्नमेंट) आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है ।
- हाई कोर्ट की कड़ी फटकार: जस्टिस माधव जामदार ने मुंबई पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना और 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद' या 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाना किसी नागरिक को उसके शहर से निकालने का वैध आधार नहीं हो सकता ।
- अधिकारों का हनन: अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस का यह कदम नागरिक के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा के साथ जीने के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19 और 21) का सीधा उल्लंघन है ।
- मामले की पृष्ठभूमि: सईद चौधरी सीएए (CAA), एनआरसी (NRC) और पेपर लीक जैसे जनहित के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 188 के तहत दर्ज मामलों को आधार बनाकर तड़ीपार की कार्रवाई की थी, जिसे अदालत ने पुलिस शक्तियों का दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल माना ।
प्रभाव / प्रतिक्रिया:
- जस्टिस माधव जामदार: उन्होंने मौखिक सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह हैं, वे किसी मंत्री के अधीन काम करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं हैं । नागरिक भारत सरकार के गुलाम नहीं हैं ।
- एसडीपीआई (SDPI): पार्टी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की ऐतिहासिक जीत बताया और मांग की कि असहमति का अधिकार जताने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न तुरंत बंद हो ।
- प्रशांत भूषण (वरिष्ठ वकील): उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर जस्टिस जामदार के साहस की सराहना करते हुए लिखा कि यह फैसला दिखाता है कि अब भी ऐसे जज मौजूद हैं जो सरकार से सवाल पूछने और नागरिकों के अधिकारों के लिए खड़े होने का हौसला रखते हैं ।
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