राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अनूप कुमार धांड की एकल पीठ ने बच्चों के स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्कूल कैंटीन और स्कूल परिसर के 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, हाई शुगर और हाई साल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों (जैसे—चिप्स, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, ट्रांस फैट बेकरी उत्पाद) की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
इसके अलावा, अदालत ने निम्नलिखित प्रमुख निर्देश दिए हैं:
- फूड सेफ्टी कमेटी: हर स्कूल में शिक्षक, अभिभावक और छात्रों की भागीदारी वाली 'फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमेटी' बनाई जाएगी, जिसकी जानकारी शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर होगी।
- मेन्यू बोर्ड व लेबलिंग: आठ सप्ताह के भीतर स्कूल कैंटीन में खाद्य पदार्थों की कैलोरी और न्यूट्रिशन संबंधी विवरण वाले मेन्यू बोर्ड लगाने और ट्रैफिक-लाइट आधारित लेबलिंग लागू करने के आदेश दिए गए हैं।
- अन्य निर्देश: कोर्ट ने जंक फूड के साथ-साथ बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम, एआई (AI) के प्रभाव और बुनियादी सुविधाओं (जैसे शौचालय, पेयजल, खेलकूद) में सुधार लाने पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
प्रभाव / प्रतिक्रिया:
- महाराष्ट्र में एफडीए (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा शुरू की गई मुहिम और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद, अब राजस्थान हाईकोर्ट के इस रुख से देश भर में स्कूली बच्चों के खान-पान और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक सकारात्मक संदेश गया है।
- अभिभावकों और शिक्षाविदों ने इस कदम का स्वागत किया है, जिससे बच्चों की मूल सीखने की क्षमता और शारीरिक स्वास्थ्य को नया संरक्षण मिलेगा।
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Rajasthan High Court bans the sale of high-fat, high-sugar junk food within a 50-meter radius of schools. Learn about the new food safety guidelines and school committee mandates.