मध्यप्रदेश में आवास क्रांति: 42,000 नए घर स्वीकृत

Union Minister Manohar Lal and CM Mohan Yadav at the PMAY-U 2.0 event in Indore, Madhya Pradesh.

मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U 2.0) के तहत विकास को नई गति मिली है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में 42,000 से अधिक नए पक्के घरों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की, जिससे हजारों शहरी गरीब परिवारों का अपने घर का सपना साकार होगा।

इंदौर में आवास योजना की बड़ी सौगात

इंदौर जिले के सांवेर में आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान राज्य के 80,000 से अधिक परिवारों को इस योजना का लाभ मिला। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने 42,000 नए आवासों की मंजूरी देने के साथ-साथ 38,000 परिवारों के 'गृह प्रवेश' समारोह में भी हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हर नया घर परिवार के लिए गरिमा, सुरक्षा और आशा का प्रतीक है और सरकार 'सभी के लिए आवास' के विजन को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वित्तीय सहायता और मध्यप्रदेश का प्रदर्शन

PMAY-U 2.0 के तहत स्वीकृत इन मकानों के लिए केंद्र सरकार ने ₹1,050 करोड़ की सब्सिडी को मंजूरी दी है। इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को पक्का घर बनाने या खरीदने के लिए ₹2.5 लाख तक की वित्तीय सहायता सीधे ग्रिड ट्रांसफर के जरिए दी जा रही है। मध्यप्रदेश इस योजना के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है, जहाँ अब तक कुल 10.39 लाख घर स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 9.08 लाख का निर्माण पूरा हो चुका है।

आर्थिक प्रभाव और रियल एस्टेट में उछाल

इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का सीधा असर मालवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और स्थानीय बाजार पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू होने से स्टील, सीमेंट सप्लायर्स और स्थानीय सिविल कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए बिजनेस (B2G) के बड़े अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के आसपास की कमर्शियल भूमि और रियल एस्टेट की वैल्यूएशन में 15% से 20% तक की बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई गई है।

महिला सशक्तिकरण पर जोर

यह योजना केवल सुरक्षित आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण में भी बड़ी भूमिका निभा रही है। नियमों के अनुसार, घर का मालिकाना हक परिवार की महिला सदस्य के नाम पर या संयुक्त रूप से होना अनिवार्य है। इससे न केवल शहरी गरीबों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है, बल्कि उन्हें समाज में एक स्थाई संपत्ति और सुरक्षा भी मिल रही है।
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