शी जिनपिंग और ट्रंप की मुलाकात: क्या बनेगा G2?

US President Donald Trump and Chinese President Xi Jinping meeting in Beijing for strategic talks.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के आधिकारिक दौरे पर बीजिंग पहुंचे हैं, जहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका भव्य स्वागत किया। इस ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात ने वैश्विक स्तर पर 'G2' ब्लॉक की चर्चा तेज कर दी है, जिससे दुनिया की दो महाशक्तियों के एक अनौपचारिक समूह बनाने की संभावना बढ़ गई है,।

रेड कार्पेट स्वागत और G2 की सुगबुगाहट

गुरुवार को बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप का स्वागत रेड कार्पेट बिछाकर किया गया। इस मुलाकात के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में 'G2' (Group of Two) की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। ट्रंप पहले भी कई बार इस समूह का जिक्र कर चुके हैं और सोशल मीडिया पर "G2 जल्द आने वाला है" जैसे संकेत दे चुके हैं। यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकता है।


क्या है G2 का विचार

G2 का विचार सबसे पहले 2005 में अमेरिकी अर्थशास्त्रियों द्वारा दिया गया था, जिसका उद्देश्य अमेरिका और चीन का मिलकर वैश्विक मुद्दों को संभालना था। ओबामा के कार्यकाल में भी इस दिशा में कुछ प्रयास हुए थे, लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई,। अब शी जिनपिंग ने फिर से जोर दिया है कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय पार्टनर बनना चाहिए, जबकि ट्रंप ने जिनपिंग को अपना 'दोस्त' बताया है।



चीन का रुख और चुनौतियां

भले ही चर्चाएं तेज हों, लेकिन चीन के कई विशेषज्ञ मानते हैं कि 'G2' का विचार पूरी तरह व्यवहारिक नहीं है। चीन का आधिकारिक रुख 'मल्टीपोलर वर्ल्ड' (बहुध्रुवीय विश्व) का है, जहां फैसले केवल दो नहीं बल्कि कई देश मिलकर लें। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच 'नंबर एक' बनने की होड़ भी इस गठबंधन की राह में एक बड़ी बाधा है।


भारत और 'क्वॉड' पर प्रभाव

अगर अमेरिका और चीन के बीच यह रणनीतिक मेल-मिलाप होता है, तो इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका चीन को एशिया के 'मैनेजर' के तौर पर स्वीकार करता है, तो क्षेत्रीय स्तर पर भारत का प्रभाव कम हो सकता है। इससे 'क्वॉड' (Quad) जैसे समूहों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठ सकते हैं, जिन्हें चीन को काउंटर करने के लिए बनाया गया है
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