प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल को कम करने की अपील के बाद देश के कई हिस्सों में पैनिक की स्थिति देखी गई। दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर रात से ही लंबी कतारें लग गईं, क्योंकि लोगों को ईंधन की कमी और दाम बढ़ने का डर सताने लगा।
विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पीएम का आह्वान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान देश की जनता से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने का विशेष आग्रह किया। पीएम मोदी ने तर्क दिया कि कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) वैश्विक बाजार में काफी बढ़ गई हैं, जिससे देश की विदेशी मुद्रा तेजी से खर्च हो रही है। उन्होंने जनता को सुझाव दिया कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोग कारपूलिंग और मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें। इसके साथ ही, उन्होंने एक साल तक सोने के गहने, विदेशी यात्राओं और खाने के तेल का इस्तेमाल भी कम करने की अपील की है।
अफवाहों ने बढ़ाया पैनिक पीएम मोदी के इस संबोधन के तुरंत बाद, रात करीब 11 बजे से ही पेट्रोल पंपों पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई। विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर और गाजियाबाद के लाल कुआं जैसे इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया, जहां लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए।
पंप पर पहुंचे लोगों में इस बात का डर था कि सरकार भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने वाली है या फिर इसकी सप्लाई में कटौती की जा सकती है। कई नागरिकों का मानना था कि पीएम की 'अपील' दरअसल कीमतों में बढ़ोतरी या संभावित संकट की एक चेतावनी है।
पंप मालिकों और विशेषज्ञों की राय बढ़ती भीड़ को देखते हुए पेट्रोल पंप के कर्मचारियों और मालिकों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। गाजियाबाद में पंप कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनके पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि पीएम की यह अपील आर्थिक सुरक्षा और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए थी, न कि किसी तात्कालिक संकट के संकेत के लिए।
फिलहाल, प्रशासन और मीडिया ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बुकिंग या पैनिक बाइंग से बचें।
