तमिलनाडु के नवनियुक्त तमिलनाडु मुख्यमंत्री विजय द्वारा पदभार संभालते ही पिछली सरकार पर खजाना खाली करने के आरोपों ने राज्य में सियासी पारा बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री ने जहां 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे बड़े वादे किए हैं, वहीं पूर्व सीएम एम.के. स्टालिन ने इन दावों को भ्रामक और गलत करार दिया है।
शपथ ग्रहण और पहले तीन बड़े फैसले
तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय ने 10 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कार्यभार संभालते ही उन्होंने तीन प्रमुख आदेशों पर हस्ताक्षर किए: 200 यूनिट मुफ्त बिजली (500 यूनिट से कम खपत वाले परिवारों के लिए), नशा विरोधी विशेष बल का गठन और महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'लायन वुमन टास्क फोर्स' की स्थापना। मुख्यमंत्री ने अपने पहले संबोधन में राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर पिछली सरकार की कड़ी आलोचना की।
खजाने और कर्ज पर छिड़ी सियासी जंग
मुख्यमंत्री विजय ने दावा किया कि पिछली सरकार करीब 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज और "खाली खजाना" छोड़कर गई है। उन्होंने स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक 'श्वेत पत्र' जारी करने की बात कही। इस पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा कि राज्य का कर्ज सीमा के भीतर है और बजट में सब कुछ स्पष्ट रूप से बताया गया है। स्टालिन ने नसीहत दी कि सत्ता में आते ही "पैसा नहीं है" कहना शुरू नहीं करना चाहिए, बल्कि शासन चलाने की क्षमता दिखानी चाहिए।
क्या वाकई वित्तीय संकट है
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, "खजाना खाली है" कहना पूरी तरह तर्कसंगत नहीं है क्योंकि वित्तीय व्यवस्था आय और व्यय की निरंतरता पर आधारित होती है। आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु का कुल बकाया कर्ज लगभग 9.52 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। हालांकि कर्ज बढ़ा है, लेकिन राज्य की अर्थव्यवस्था (GSDP) का आकार भी दोगुना होकर करीब 40 लाख करोड़ रुपये हो गया है। राज्य का कर्ज-जीडीपी अनुपात 26.43 प्रतिशत है, जो 28.5 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर ही है।
भविष्य की चुनौतियां और वादों का बोझ
विजय ने महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने, मुफ्त बस यात्रा और शादी में सोना देने जैसे कई बड़े वादे किए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन सभी वादों को पूरा करने के लिए सरकार को सालाना लगभग एक लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता होगी। इतनी बड़ी राशि जुटाना मुख्यमंत्री विजय के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि अत्यधिक खर्च से राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा रहता है।
