वैश्विक आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए पीएम मोदी की अपील ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अगले एक साल तक सोना न खरीदने, पेट्रोल-डीजल की बचत करने और वर्क-फ्रॉम-होम अपनाने का आग्रह किया है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
आर्थिक सुरक्षा के लिए सात बड़े आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से "सामूहिक जिम्मेदारी" निभाने का आग्रह करते हुए सात प्रमुख बातें साझा की हैं। उन्होंने लोगों से अगले एक साल तक सोने की खरीद टालने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, खाद्य तेल के उपयोग में कटौती करने और पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने को कहा है। इसके अलावा, उन्होंने कंपनियों से वर्क-फ्रॉम-होम को प्राथमिकता देने और किसानों से रासायनिक खाद का उपयोग 50 फीसदी तक कम करने की अपील भी की है।
क्यों जरूरी है यह कदम
इस अपील के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम-एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें हैं। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिसे खरीदने के लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपया गिरकर 95 के स्तर को पार कर गया है। सरकार का मानना है कि अगर नागरिक सोना और विदेश यात्रा जैसे 'स्वैच्छिक' खर्चों में कटौती करेंगे, तो बचा हुआ विदेशी मुद्रा भंडार तेल जैसी अनिवार्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
विपक्ष और व्यापारियों की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के इस संदेश पर देश में बहस छिड़ गई है। विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने इस अपील की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनाव खत्म होने का इंतजार कर रही थी और अब अपनी आर्थिक विफलताओं का बोझ आम जनता पर डाल रही है।
दूसरी ओर, सर्राफा व्यापारियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ व्यापारियों का मानना है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और वे ग्राहकों से कम सोना खरीदने की अपील करेंगे। हालांकि, इंदौर और रायपुर के कुछ व्यापारियों ने चिंता जताई है कि इससे शादियों का सीजन प्रभावित होगा और इस क्षेत्र से जुड़े कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
क्या वाकई कोई संकट है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अपील किसी तात्कालिक कमी के कारण नहीं, बल्कि भविष्य की "लॉन्ग टर्म एनर्जी सिक्योरिटी" के लिए की गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल और 703 अरब डॉलर का पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। सरकार का उद्देश्य लोगों में घबराहट पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक संकट के प्रति सतर्क करना है।
