देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट: 4 अधिकारी सस्पेंड, न्यायिक जांच शुरू

Site of the firecracker factory explosion in Dewas, Madhya Pradesh with rescue teams.

मध्यप्रदेश के देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। टोंककला में हुए इस भीषण हादसे में अब तक 6 मजदूरों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं। सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों पर गिरी गाज 

देवास जिले के टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद लापरवाही बरतने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की गई है। उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने टोंकखुर्द एसडीएम (SDM) संजीव सक्सेना और नायब तहसीलदार रवि शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अतिरिक्त, गृह विभाग ने सोनकच्छ एसडीओपी (SDOP) दीपा मांडवे और देवास पुलिस अधीक्षक ने चौकी प्रभारी रमनदीप हुंडल को भी लापरवाही के चलते सस्पेंड कर दिया है। इन अधिकारियों पर फैक्ट्री के नियमित निरीक्षण और विस्फोटक सामग्री की निगरानी में चूक के गंभीर आरोप हैं।

न्यायिक जांच आयोग का गठन 

हादसे की भयावहता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग के गठन का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय के रिटायर जज सुभाष काकड़े इस आयोग के अध्यक्ष होंगे, जो एक महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेंगे। इसके साथ ही मामले की मजिस्ट्रियल जांच भी समानांतर रूप से चल रही है।

मुआवजे का ऐलान और वर्तमान स्थिति 

इस दर्दनाक हादसे में अब तक 6 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं, जिनका इलाज देवास और इंदौर के अस्पतालों में चल रहा है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और घायलों का मुफ्त इलाज कराने की घोषणा की है।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल 

हादसे के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजामों की पोल खुल गई है। चश्मदीद मजदूरों का दावा है कि वहां अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। यह भी सामने आया है कि कई मजदूरों को "धूल-मिट्टी के काम" का झांसा देकर बिहार से यहां लाया गया था। वर्तमान में प्रशासन मलबे की जांच कर रहा है ताकि विस्फोट के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

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