मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जल संकट (Bhopal Water Crisis) और एनजीटी के नोटिस ने वीआईपी रोड के रहवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एशिया के सबसे बड़े कृत्रिम तालाब के किनारे बसने के बावजूद ये लोग मार्च महीने से बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं।
वीआईपी रोड पर विरोधाभासी स्थिति
भोपाल का वीआईपी रोड, जिसे शहर का सबसे खूबसूरत हिस्सा माना जाता है, इन दिनों एक दर्दनाक विरोधाभास का सामना कर रहा है। जो बड़ा तालाब पूरे शहर के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से की प्यास बुझाता है, उसके ठीक किनारे बसे घरों में मार्च से पानी का हाहाकार मचा हुआ है। स्थानीय निवासियों के लिए स्थिति और भी गंभीर हो गई है क्योंकि उन्हें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के तहत अपने आशियाने ढहने का डर भी सता रहा है।
मार्च से गहराया पानी का संकट
रहवासियों के अनुसार, पहले सुबह 5 से 8 बजे के बीच भरपूर दबाव के साथ जलापूर्ति होती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह अनिश्चित हो चुकी है। पानी अब केवल नाममात्र के लिए टपकता है, जिससे छतों पर रखी टंकियां भी नहीं भर पा रही हैं। निवासियों का आरोप है कि वीआईपी रोड की जल आपूर्ति को पास की 'शहीद कॉलोनी' की तरफ डायवर्ट कर दिया गया है, जिस कारण उन्हें इस भीषण किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक अनदेखी और बेअसर हेल्पलाइन
परेशान नागरिकों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (शिकायत नंबर 38100678) पर भी अपनी गुहार लगाई है। हालांकि, हेल्पलाइन से आश्वासन तो मिला, लेकिन जमीन पर कोई सुधार नहीं हुआ है। दूसरी ओर, भोपाल नगर निगम (BMC) के जोन-2 के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पूरे गंभीर मामले पर चुप्पी साध रखी है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
दोहरी मार झेल रहे रहवासी
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी खिड़कियों से पूरा बड़ा तालाब साफ नजर आता है, फिर भी वे पानी के लिए तरस रहे हैं। एक तरफ घरों को तोड़ने के एनजीटी के नोटिस का मानसिक खौफ है और दूसरी तरफ दैनिक जरूरतों के लिए पानी का संघर्ष। प्रशासन की इस बेरुखी ने इन परिवारों को अधर में लटका दिया है, जिन्हें फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।