भारत ने बनाया पहला स्वदेशी टरबोजेट इंजन, रक्षा क्षेत्र में रचा इतिहास

India's first indigenous 350 kg thrust turbojet engine developed by DRDO GTRE and Azad Engineering

DRDO की प्रयोगशाला गैस टरबाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) और हैदराबाद आधारित निजी कंपनी आजाद इंजीनियरिंग ने मिलकर भारत का पहला स्वदेशी 350 kg थ्रस्ट एक्सपेंडेबल टरबोजेट इंजन विकसित कर डिलिवर कर दिया है। यह कदम भारत की रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। अब तक जेट इंजनों के लिए अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों पर निर्भर रहने वाला भारत अब इंजन निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इस छोटे टरबोजेट इंजन तकनीक का सीधा लाभ देश की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों, स्टील्थ ड्रोन (जैसे Ghatak UAV) और 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों (AMCA) को मिलेगा।

प्रभाव / प्रतिक्रिया:


  • विदेशी निर्भरता में कमी: अमेरिका (GE) और फ्रांस से टरबाइन एवं जेट इंजनों की आपूर्ति पर निर्भरता खत्म होगी तथा विदेशी प्रतिबंधों का जोखिम नगण्य हो जाएगा।

  • प्राइवेट सेक्टर की ताकत: डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में निजी कंपनियों का प्रवेश एयरोस्पेस ग्रेड माइक्रोन-लेवल निर्माण क्षमता को तेज और मजबूत बनाएगा।

  • रणनीतिक मजबूती: जेट इंजनों के लिए आवश्यक सुपरअलॉयज और सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड तकनीक पर भारत ने अपनी पकड़ साबित कर दी है।


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DRDO GTRE and Azad Engineering deliver India's first indigenous 350 kg thrust turbojet engine, paving the way for 5th-gen fighter jets and stealth drones.
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