मलक्का स्ट्रेट में भारत की रणनीतिक एंट्री, बनेगा नया होर्मुज

Strategic map of Sabang Port at the entrance of Strait of Malacca near India's Great Nicobar project

भारत अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करते हुए इंडोनेशिया के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ मलक्का के मुहाने पर स्थित सबांग पोर्ट को विकसित करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे पर वहाँ के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित है और भारत के महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से मात्र 160 किलोमीटर (100 मील) की दूरी पर है। स्ट्रेट ऑफ मलक्का से हर साल करीब 2,800 अरब डॉलर का वैश्विक व्यापार होता है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा और माल आपूर्ति की प्रमुख धमनी बनाता है।


प्रभाव / प्रतिक्रिया:

  • चीन की 'मलक्का दुविधा' और घेराबंदी: यह समझौता चीन के 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' और 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' का सीधा जवाब माना जा रहा है। चीन अपनी ऊर्जा और आयात-निर्यात के लिए पूरी तरह मलक्का जलडमरूमध्य पर निर्भर है। 2003 में खुद पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने 'मलक्का दुविधा' का जिक्र किया था कि युद्ध या संकट की स्थिति में यह रास्ता बंद होने पर चीन की अर्थव्यवस्था चोक हो सकती है। अब सबांग पोर्ट पर भारत का दखल चीन के पूरे गेम प्लान को बदल देगा।

  • रणनीतिक श्रृंखला का निर्माण: भारत पहले से ही अंडमान निकोबार में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत अंतरराष्ट्रीय ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट और अन्य बुनियादी ढांचों का निर्माण कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग और ग्रेट निकोबार परियोजनाओं के संयुक्त विकास से भारत को मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों छोर पर अभूतपूर्व रणनीतिक और निगरानी पहुंच प्राप्त हो जाएगी।

  • होर्मुज जैसी स्थिति से सुरक्षा: जिस तरह ईरान ने हालिया युद्ध और तनाव के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दुनिया की 20 फीसदी ईंधन आपूर्ति को प्रभावित किया और कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी, वैसी ही रणनीतिक क्षमता अब भारत और इंडोनेशिया के पास मलक्का स्ट्रेट में होगी।

  • इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन: भारत और इंडोनेशिया दोनों ही एक मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था के समर्थक हैं। यह साझेदारी समुद्री व्यापार, नौवहन की स्वतंत्रता और आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा को मजबूत करेगी।


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