सेमीकंडक्टर मिशन: गुजरात के बाद अब इन राज्यों की बारी

Semiconductor manufacturing expansion map of India showing new clusters in UP, Odisha, and Rajasthan.

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन (Semiconductor Mission) अब केवल गुजरात तक सीमित नहीं है। सरकार ने देश को वैश्विक स्तर पर एक 'भरोसेमंद तकनीकी किला' बनाने के लिए ओडिशा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में नए चिप क्लस्टर्स की नींव रख दी है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में क्रांति आएगी,।

रणनीतिक बदलाव: भौगोलिक विविधीकरण

अब तक भारत का सेमीकंडक्टर सपना मुख्य रूप से गुजरात के साणंद और धोलेरा (टाटा और माइक्रोन के प्रोजेक्ट्स) के इर्द-गिर्द घूम रहा था। लेकिन बाहरी विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार (जिन्हें आपको स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना चाहिए), भारत सरकार की ₹76,000 करोड़ की 'सेमीकॉन इंडिया' योजना का अगला चरण भौगोलिक विकेंद्रीकरण पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी क्षेत्रीय या भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में देश की सप्लाई चेन बाधित न हो,।

नए राज्यों में उभरते 'चिप हब'

सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, देश के अन्य हिस्सों में अब अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है:
  • ओडिशा (भुवनेश्वर): यहाँ देश की पहली एडवांस्ड 3D सेमीकंडक्टर पैकेजिंग यूनिट पर काम शुरू हुआ है। यह विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रक्षा उपकरणों के लिए उच्च क्षमता वाले चिप्स तैयार करेगी।
  • उत्तर प्रदेश (जेवर): जेवर एयरपोर्ट के पास HCL और फॉक्सकॉन (Foxconn) का संयुक्त उद्यम (JV) एक बड़ा चिप क्लस्टर विकसित कर रहा है।
  • राजस्थान (भिवाड़ी): यहाँ नए फैब्रिकेशन और चिप डिजाइन सेंटर सक्रिय किए जा रहे हैं।

तकनीकी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता

भारत का यह कदम केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक 'मल्टी-स्टेट ट्रस्टेड टेक फोर्ट्रेस' बनाने की दिशा में बड़ी छलांग है। बाहरी जानकारी के अनुसार, ताइवान और चीन के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को अपनी चिप सप्लाई के लिए वैकल्पिक केंद्रों की तलाश करने पर मजबूर किया है। भारत इस अवसर का लाभ उठाकर खुद को ताइवान के विकल्प के रूप में पेश कर रहा है, जो डीप-टेक और डिफेंस सेक्टर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है,।

भविष्य का प्रभाव

इस विस्तार से न केवल लाखों तकनीकी रोजगार पैदा होंगे, बल्कि भारत की 'इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण' क्षमता में भी भारी वृद्धि होगी। 

स्रोतों के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा चिप उपभोक्ता और निर्माता बनना है।
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