भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव: नो-मैन्स लैंड में फंसे 9 नागरिक

Nine Bangladeshi citizens stuck in no-man's land at the Assam border during a standoff between BSF and BGB.

भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा के असम स्थित मनकाचर सेक्टर में भारी तनाव बना हुआ है। पिछले दो दिनों से 9 बांग्लादेशी नागरिक नो-मैन्स लैंड में फंसे हुए हैं। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने इन नागरिकों को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है।

फ्लैग मीटिंग रही बेनतीजा

सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों के अनुसार, इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए रविवार को दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच एक फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई थी। हालांकि, लंबी चर्चा के बावजूद यह बैठक बेनतीजा रही और बीजीबी ने अपने नागरिकों को स्वीकार करने पर कोई ठोस सहमति नहीं जताई। सोमवार को एक और दौर की बैठक होने की संभावना है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

काम की तलाश में आए थे युवक

दरअसल, रविवार को बीएसएफ जवानों को गश्त के दौरान नो-मैन्स लैंड में 9 व्यक्ति फंसे हुए मिले, जिनमें से अधिकांश युवा हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में फंसे हुए लोग खुद को बांग्लादेशी नागरिक बता रहे हैं और कह रहे हैं कि वे काम की तलाश में भारत आए थे। उनमें से एक व्यक्ति ने रोते हुए दावा किया कि उनके पास बांग्लादेशी होने के पुख्ता प्रमाण हैं और वे किसी भी हाल में भारत की ओर नहीं जाना चाहते।

असम सरकार और BSF की सख्ती

हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ को लेकर सुरक्षा एजेंसियां काफी सतर्क हैं। पिछले सात दिनों में असम पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त कार्रवाई में कुल 21 घुसपैठियों को पकड़ा गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस सतर्कता की सराहना करते हुए कहा है कि सीमाओं को अवैध घुसपैठ से मुक्त रखने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने पड़ोसी राज्यों से भी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने का आह्वान किया है।

मानवीय आधार पर मदद और चुनौतियां

मनकाचर सेक्टर अपनी भौगोलिक स्थिति (नदियों और घने जंगलों) के कारण घुसपैठ और तस्करी के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। फिलहाल, नो-मैन्स लैंड में फंसे इन लोगों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। बीएसएफ ने मानवीय आधार पर उन्हें भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जबकि उनकी वापसी को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
और नया पुराने