केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला करते हुए उन्हें 'अक्षम' करार दिया और साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्रों में धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्रों में धोखाधड़ी का आरोप
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 'कोएम्पट' (COEMPT) नामक कॉन्ट्रैक्टर ने निविदा की शर्तों को पूरा करने के लिए सीबीएसई को जो दो साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्र दिए थे, वे फर्जी या दूसरे ग्राहकों से जुड़े थे,। इनमें से एक प्रमाणपत्र की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी, जबकि दूसरे का केवल एक अस्थायी आवेदन के रूप में ऑडिट किया गया था।
लाखों छात्रों के भविष्य पर संकट
जयराम रमेश के अनुसार, सीबीएसई ने इन खामियों को उजागर करने के बजाय उक्त कंपनी को बढ़ी हुई दरों पर ठेका दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि एथिकल हैकर्स ने फरवरी 2025 में ही इन साइबर सुरक्षा कमियों की चेतावनी दी थी, लेकिन मंत्रालय ने इसे तब तक नकारा जब तक स्थिति अनियंत्रित नहीं हो गई। रमेश ने कहा कि यदि मंत्रालय ने पुनर्मूल्यांकन और ओएसएम (OSM) प्रणाली में ईमानदारी दिखाई होती, तो लाखों छात्रों और उनके परिवारों को इस तनावपूर्ण स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
इस्तीफे की मांग और तीखा हमला
शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने धर्मेंद्र प्रधान के पद पर बने रहने को सत्ता के प्रति उनकी "निर्लज्ज लालसा" बताया है,। जयराम रमेश ने मंत्री को "अहंकारी और अक्षम" बताते हुए कहा कि वह एक समझौतावादी मंत्रालय चला रहे हैं,। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती और मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।