Bhopal : गुरु–द्रोह का वो अध्याय: जहाँ सुन्दरकांड की गूँज में लिखा गया 2 करोड़ का खौफनाक सपना।
सारांश :
- पीड़िता: शुभ्रा रंजन, दिल्ली की प्रसिद्ध IAS कोचिंग निदेशक।
- आरोपी: पूर्व छात्र प्रियंक शर्मा, साथियों सहित 6 गिरफ्तार।
- घटना: व्यापारिक झाँसे पर भोपाल बुलाकर फ्लैट में बंधक बनाया, पिस्तौल से धमकाकर 2 करोड़ ऑनलाइन ट्रांसफर कराए।
- अनोखा ढक्कन: बंधक के दौरान सुन्दरकांड का पाठ कराकर आवाज दबाई।
- पकड़: आरोपी ने AIIMS में भर्ती होकर बचने का प्रयास किया, गिरफ्तारी के बाद पिस्तौल बरामद।
पहला दृश्य: झाँसा और आगमन
शुभ्रा रंजन, जिनके मार्गदर्शन में सैकड़ों अभ्यर्थी सिविल सेवा का स्वप्न देखते हैं, एक पुराने शिष्य प्रियंक शर्मा (उर्फ प्रतीक) के कॉल पर भोपाल आईं। उनका कहना था– एक नया सेंटर खोलना है, बिजनेस प्लान पर चर्चा करनी है। विश्वास जीता हुआ एक पुराना रिश्ता, इसलिए संदेह नहीं हुआ। वे टाज होटल में ठहरीं, यह सोचते हुए कि यह एक शिष्टाचार भरी मुलाकात होगी। पर यह तो महज पर्दा था।
दूसरा दृश्य: बंधक और सुन्दरकांड का ढक्कन
होटल से ले जाकर उन्हें बागसेवनिया के एक फ्लैट में ठूँस दिया गया। वही पूर्व छात्र जो कभी उनके क्लासरूम में आगे की कतार में बैठता था, आज उनकी कनपटी पर पिस्तौल सटा रहा था। और वह भी तब, जब फ्लैट के दूसरे कमरे से सुन्दरकांड का पाठ गूँज रहा था। उन लोगों ने चिल्लाने या शोर मचाने के खिलाफ एक मौलिक बैरियर खड़ा कर दिया था—धार्मिक अनुष्ठान। पाठ की स्वरलहरियों के बीच दबी आवाज में शुभ्रा को डिजिटल ट्रांसफर के जरिए 2 करोड़ रुपये भेजने को मजबूर किया गया। हर ट्रांजैक्शन पर पिस्तौल की नोक, हर देरी पर धमकी। चार घंटे का वह अंतराल एक जीवनभर की यातना जैसा था।
तीसरा दृश्र: फरारी, नाटक और गिरफ्तारी
पैसे मिलने के बाद शुभ्रा को छोड़ दिया गया। उन्होंने तुरंत क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। तब तक आरोपी प्रियंक ‘नाटक’ के दूसरे अंक में प्रवेश कर चुका था—सीने में दर्द का बहाना बनाकर उसने AIIMS भोपाल में दाखिला ले लिया। शायद उसे लगा कि बीमारी का मुखौटा कानून से बचा लेगा। पर पुलिस उसे वहीं से उठा लाई। अब तक कुल छह आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें प्रियंक मास्टरमाइंड है। उससे पिस्तौल बरामद कर ली गई है, और 2 करोड़ की रकम जिन खातों में गई थी, उन्हें फ्रीज कर दिया गया है।
अंतिम दृश्य: गुरु-शिष्य का वह बदलता चेहरा
यह सिर्फ एक लूट की खबर नहीं है। यह उस संस्थागत विश्वास का खूनी खंडन है जो कोचिंग संस्थानों और उनके भूतपूर्व विद्यार्थियों के बीच होता है। प्रियंक, जो कभी शुभ्रा रंजन के संस्थान से पढ़ा था, आज उसी गुरु को ‘भुगतान मशीन’ बना देता है। बचाव पक्ष से लेकर आरोपी पक्ष तक का यह सफर इंसानी लालच की विकरालता को दिखाता है।
फिलहाल पुलिस रिमांड में आरोपियों से पूछताछ जारी है। शुभ्रा रंजन सुरक्षित हैं, पर यह घटना कोचिंग जगत के लिए एक बड़ी चेतावनी बनकर उभरी है– हर पूर्व छात्र मित्र नहीं होता, और हर व्यापारिक प्रस्ताव के पीछे पिस्तौल छिपी हो सकती है।