कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से ठीक 48 घंटे पहले चुनावी मैदान में एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है। ABP लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, मगराहाट और डायमंड हार्बर विधानसभा सीटों के 15 संवेदनशील मतदान केंद्रों पर हुए पुनर्मतदान (रिपोलिंग) में 90% तक मतदान दर्ज किया गया। इस अप्रत्याशित उच्च मतदान ने 4 मई को आने वाले अंतिम परिणामों से पहले राजनीतिक समीकरणों को और रोमांचक बना दिया है।
पुनर्मतदान का पूरा गणित:
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को हुए इस पुनर्मतदान में मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई इस प्रक्रिया में 90% मतदान का आंकड़ा यह संकेत देता है कि इन सीटों पर जनादेश स्पष्ट और निर्णायक होगा। मगराहाट और डायमंड हार्बर, दोनों ही क्षेत्र ममता बनर्जी के पारंपरिक प्रभाव वाले माने जाते हैं, जिससे यहां की उच्च मतदान दर ने सभी दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
हिंसा-मुक्त चुनाव पर गर्व का माहौल:
इस बीच, पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी देबाशीष सेन का एक बयान सुर्खियों में है। उन्होंने पूरे चुनावी प्रक्रिया को "हिंसा-मुक्त और शिकायत-मुक्त" करार देते हुए चुनाव आयोग को A+ ग्रेड दिया है। उनका कहना था, "सबसे अच्छी बात यह रही कि चुनाव में कोई शिकायत नहीं आई।" हालांकि, उन्होंने एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर चिंता जताई, जिसके चलते लगभग 2,70,000 मतदाता अपने वोट के अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए। इस चूक के लिए उन्होंने आयोग को B-माइनस ग्रेड दिया।
क्या कहते हैं एग्जिट पोल?
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मतदान समाप्त होने के बाद सभी एग्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं। हालांकि, एग्जिट पोल ने जो तस्वीर पेश की है, उस पर अंतिम मुहर 4 मई की मतगणना के बाद ही लगेगी। विशेषकर पश्चिम बंगाल में, जहां तृणमूल कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए प्रयासरत है और विपक्षी बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है, यह पुनर्मतदान का उच्च प्रतिशत खेल को पूरी तरह बदल सकता है।
अंतिम परिणाम पर सबकी निगाहें:
4 मई की सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होने के साथ ही पांचों राज्यों की 824 विधानसभा सीटों पर किस्मत का फैसला हो जाएगा। रुझानों से लेकर अंतिम नतीजों तक हर पल का अपडेट पाने के लिए ABP लाइव के साथ बने रहना न भूलें। यह चुनाव केवल सरकार चुनने का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और पारदर्शिता पर जनता की मुहर लगाने का भी अवसर है। क्या ममता बनर्जी बंगाल में इतिहास दोहराएंगी या फिर कमल खिलेगा? आने वाले कल में इस रोमांचक सवाल का जवाब मिलेगा।