ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवा और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए कई बड़े कदमों की घोषणा की है। सरकार का मुख्य ध्यान गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित रेस्क्यू, उन्हें समय पर अस्पतालों तक पहुँचाने और बाढ़ के दौरान बढ़ने वाले सर्पदंश (सांप के काटने) के मामलों के त्वरित इलाज पर है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा और निगरानी के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक समीक्षा समिति का गठन किया गया है। मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारियों (CDMOs) और जिलाधिकारियों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, राहत सामग्री और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे उन्नत चरण की गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित स्थानों और प्रसूति अस्पतालों तक पहुँचाने की व्यवस्था करें। यह योजना फिलहाल तीन जिलों में लागू कर दी गई है और स्थिति के अनुसार इसे चौथे जिले तक बढ़ाया जा सकता है।
प्रभाव / प्रतिक्रिया:
- ओडिशा के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है और तीन सबसे अधिक प्रभावित जिलों में सुधार हो रहा है।
- आपदा प्रबंधन मंत्री ने बताया कि, लगभग 2 लाख लोग सीधे प्रभावित हुए हैं और 30,000 से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।
- भद्रक जिले के कलेक्टर दिलीप राउतराय के अनुसार, वैतरणी और सालंदी नदियों के जलस्तर में वृद्धि से जिले के 61 ग्राम पंचायतों के 261 गांवों में करीब 2.45 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जहाँ प्रभावितों के लिए 51 मुफ्त रसोई (फ्री किचन) की व्यवस्था की गई है।
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Odisha Health Minister Mukesh Mahaling announced special medical measures for flood-hit areas, prioritizing the safe evacuation of pregnant women, hospital access, and snakebite management. Review committees, CDMOs, and ASHA workers are actively coordinating relief efforts across affected districts.