प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026 (एनआईपीयू-2026) के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश में गैस आधारित नई यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देना और उर्वरक क्षेत्र में नए निवेश को आकर्षित करना है। यह नीति वर्ष 2012 की पुरानी नीति (NIP-2012) की जगह लेगी, जिसकी अवधि अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी। वर्तमान में देश में 33 यूरिया इकाइयां काम कर रही हैं, लेकिन मांग और घरेलू उत्पादन में अंतर के कारण भारत को यूरिया आयात करना पड़ता है, जिसे यह नई नीति दूर करेगी।
प्रभाव / प्रतिक्रिया:
- यह नीति देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- एनआईपी-2012 की तुलना में इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जैसे फिक्स्ड और वेरिएबल लागत को अलग करना, 12% से 16% का वायबल रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) बैंड पेश करना और 4 साल बाद फिक्स्ड कॉस्ट को रुपये (INR) में बदलकर फॉरेन एक्सचेंज रिस्क को कम करना।
- इन पारदर्शी उपायों से नई नीति के तहत लगाए जाने वाले हर प्लांट को 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है, जिससे उर्वरक क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों का निवेश बढ़ेगा।
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The Cabinet approves the National Investment Policy for Urea-2026 (NIPU-2026) to boost domestic gas-based urea manufacturing plants, reduce import dependency, and attract new investments in India's fertilizer sector.