पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (PoK में हिंसा) और पुलिसिया बर्बरता के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। यहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प में 11 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। भारत ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है।
विरोध प्रदर्शन और भड़की हिंसा समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, पुंछ और रावलकोट में हुई इस हिंसा में 4 पुलिस अधिकारियों और 6 प्रदर्शनकारियों सहित एक राहगीर की मौत हो गई है। यह हिंसक संघर्ष तब शुरू हुआ जब 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के समर्थक एक अस्पताल के बाहर जमा हुए थे। पुलिस रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर पेट्रोल बम और ऑटोमैटिक राइफलों से हमला किया, जिसके जवाब में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी।
सीट आरक्षण पर उपजा विवाद
इस विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों में शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित करने का फैसला है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन आरक्षित सीटों पर वे लोग चुनाव लड़ते हैं जो पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं, न कि स्वयं इस क्षेत्र में। इसके अलावा, स्थानीय लोग अधिक राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। फिलहाल मुजफ्फराबाद में सभी बाजार बंद हैं और प्रदर्शनकारी लंबी पदयात्रा निकाल रहे हैं।
भारत की तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पूरी घटना पर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए 'फेक न्यूज' का सहारा ले रहा है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि PoK में पुलिस की बर्बरता की कई रिपोर्टें सामने आई हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उम्मीद जताई है कि वह पाकिस्तान को उसके इन कृत्यों और मानवाधिकारों के हनन के लिए जवाबदेह ठहराएगा।