मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने Pithampur Helion Plant Investment के तहत ₹2,000 करोड़ की लागत वाली पहली भारतीय विनिर्माण इकाई का भूमिपूजन किया। यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश को ग्लोबल फार्मा हब बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
ब्रिटेन यात्रा से पीथमपुर तक का सफर
सोमवार, 8 जून को पीथमपुर के स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में बहुराष्ट्रीय कंपनी हेलियन (Haleon) की विनिर्माण इकाई का औपचारिक भूमिपूजन हुआ। लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में फैलने वाला यह प्लांट दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा हेलियन प्लांट होगा। यह निवेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हालिया यूनाइटेड किंगडम (UK) यात्रा और वहां हुए निवेश संवादों का सुखद परिणाम है। सरकार की त्वरित नीतियों के कारण यह प्रस्ताव बहुत कम समय में धरातल पर उतर सका है।
वैश्विक बाजार में निर्यात होंगे उत्पाद
हेलियन ग्रुप अपने विश्व प्रसिद्ध ब्रांड्स जैसे सेंसोडाइन, क्रोसिन, ईनो, आयोडेक्स और ओट्रिविन के लिए जाना जाता है। पीथमपुर की इस अत्याधुनिक इकाई में मुख्य रूप से ओरल हेल्थ (मौखिक स्वास्थ्य) उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। यहाँ निर्मित उत्पाद न केवल भारतीय बाजार की मांग पूरी करेंगे, बल्कि इन्हें एशिया-प्रशांत, मध्य-पूर्व और अफ्रीका के देशों में भी निर्यात किया जाएगा। इससे मध्य प्रदेश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा।
रोजगार और स्थानीय उद्योगों को मजबूती
इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। इस प्लांट से करीब 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। कंपनी ने सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कुल कार्यबल में कम से कम 30 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त, पीथमपुर-इंदौर कॉरिडोर की स्थानीय एमएसएमई (MSME) इकाइयों, सप्लायर नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स वेंडर्स को भी लॉन्ग-टर्म सप्लाई कांट्रैक्ट्स मिलने से भारी व्यावसायिक लाभ होगा।
औद्योगिक विकास का नया अध्याय
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी प्रतिष्ठित कंपनी का मध्य प्रदेश में आना प्रदेश के औद्योगिक वातावरण की विश्वसनीयता का प्रमाण है। सिंगल विंडो सिस्टम और सुदृढ़ अधोसंरचना के कारण राज्य अब वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। यह परियोजना 'मेक इन मध्य प्रदेश' के संकल्प को सिद्ध करने में मील का पत्थर साबित होगी और राज्य को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी।