अमेरिका और ईरान के बीच 'पीस डील' के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। 111 दिनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अब भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।
ग्लोबल मार्केट में बड़ी गिरावट
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें पिछले 111 दिनों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। गुरुवार को ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत करीब 2 प्रतिशत गिरकर 77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास दर्ज की गई। पेट्रोलियम मंत्रालय की पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 17 जून 2026 को भारतीय बास्केट के लिए कच्चे तेल की कीमत गिरकर 78.48 डॉलर प्रति बैरल रह गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का रुख
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट पर प्रतिक्रिया देते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि यह मामला सरकार के संज्ञान में है। उन्होंने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय हालातों और स्थिरता को देखते हुए भविष्य में खुदरा कीमतों (Retail Prices) को कम करने के बारे में फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेल कंपनियों के लिए 'अंडर-रिकवरी' (घाटा) का संकट अब भी बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में प्रति एलपीजी सिलेंडर पर 700 रुपये, डीजल पर 27 रुपये और पेट्रोल पर 3 रुपये का नुकसान कंपनियों को झेलना पड़ रहा है।
आपूर्ति हुई सामान्य, बैकलॉग खत्म
ईरान और अमेरिका के बीच डील होने के बाद केंद्र सरकार ने आम लोगों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। सरकार के अनुसार, देश में एलपीजी (LPG) का बैकलॉग घटकर अब केवल 3.1 दिन रह गया है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और नेचुरल गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो गई है और सभी रिटेल आउटलेट्स पर ऑपरेशंस निर्बाध रूप से चल रहे हैं। इसका अर्थ है कि अब देश की किसी भी गैस एजेंसी पर ईंधन की कोई कमी नहीं है।
भारत पर प्रभाव
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत एलएनजी (LNG) और 60 प्रतिशत एलपीजी (LPG) अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आयात करता है। मध्यपूर्व एशिया में युद्ध के कारण पूर्व में यह सप्लाई बाधित हुई थी, जिसे सरकार ने नए बाजारों से तेल खरीदकर संभाला। अब वैश्विक कीमतों में गिरावट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के खुलने से भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।