प्रकरण का विवरण और कोर्ट का आदेश
न्यायमूर्ति पी.एम. रावल की एकल पीठ ने 16 जून, 2026 को यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इस मामले का शीर्षक "राहुल बाबूलाल पुरोहित बनाम गुजरात राज्य" (Rahul Babulal Purohit vs State Of Gujarat) है और इसका प्रकरण क्रमांक R/CR.MA/8320/2022 है। अदालत ने अपने फैसले में आरोपी भाइयों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से IT Act Section 66E और IPC Act Section 188 को हटाने का निर्देश दिया है।
2018 के पुराने मामले में बड़ी राहत
यह पूरा विवाद साल 2018 में गांधीनगर के सेक्टर 7 पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी से शुरू हुआ था। आरोप था कि एक उम्मीदवार ने परीक्षा हॉल के भीतर मोबाइल से प्रश्न पत्र की फोटो खींची और उसे अपने भाई राहुल पुरोहित को वॉट्सऐप पर भेज दिया। अधिकारियों ने इसे निजता का हनन और सरकारी आदेशों की अवहेलना मानते हुए मामला दर्ज किया था。
कानूनी व्याख्या और निजता की परिभाषा
हाई कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66E की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि यह धारा विशेष रूप से किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके 'प्राइवेट एरिया' (निजी अंगों) की तस्वीरें कैप्चर करने या प्रसारित करने के लिए बनी है। अदालत के अनुसार, प्रश्न पत्र को किसी भी तरह से 'निजी अंग' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, इसलिए निजता के उल्लंघन का आरोप कानूनी रूप से गलत है।
साथ ही, कोर्ट ने आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवहेलना) को भी खारिज कर दिया। अदालत का तर्क था कि परीक्षा के दौरान मोबाइल न लाने जैसे सामान्य निर्देश 'लोक सेवक द्वारा जारी विधिक आदेश' नहीं कहे जा सकते। इसके अलावा, इस धारा के तहत कार्रवाई के लिए संबंधित लोक सेवक द्वारा लिखित शिकायत की अनिवार्य कानूनी शर्त भी पूरी नहीं की गई थी।
जांच पर प्रभाव
अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही निजता और आदेश की अवहेलना की धाराएं हटा दी गई हैं, लेकिन FIR पूरी तरह रद्द नहीं हुई है। जांच अधिकारी मामले के तथ्यों के आधार पर नकल या अन्य संबंधित अपराधों के लिए अपनी जांच जारी रख सकते हैं।