भारत द्वारा वर्ष 2026 में ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता संभालने के साथ ही, सरकार ने 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) को सुरक्षित, लचीले और टिकाऊ वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में रखने का विजन पेश किया है। भारत का जोर मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए ऊर्जा प्रणालियों को आत्मनिर्भर बनाने पर है।
प्रभाव / प्रतिक्रिया :
- भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा और उनकी आर्थिक संप्रभुता की आवाज बनकर उभर रहा है।
- इससे भारत को नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और क्लीन-टेक सेक्टर में वैश्विक निवेश आकर्षित करने में बड़ी मदद मिलेगी।