राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (NIC) मध्य प्रदेश ने पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से एमपी जल निगम के अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य प्रबंधकों और कम्यूनिटी मोबलाइज़र को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है ताकि राज्य में जल प्रबंधन सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके।
डिजिटल सशक्तिकरण की ओर एक कदम
मध्य प्रदेश सरकार और एनआईसी की इस संयुक्त पहल के तहत 'पंचायत दर्पण पोर्टल' पर एमपी जल निगम के यूनीफाइड एसक्यूसी (SQC) एवं एसक्यूसी (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) के प्रबंधकों, सहायक प्रबंधकों और कम्यूनिटी मोबलाइज़र के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया गया। यह सत्र अधिकारियों को पोर्टल के उपयोग और रिपोर्टिंग प्रणाली से अवगत कराने के लिए आयोजित किया गया था ताकि मैदानी स्तर पर कार्यों की निगरानी आसान हो सके।
तकनीकी प्रशिक्षण और गुणवत्ता पर जोर
इस प्रशिक्षण सत्र में प्रतिभागियों को सॉफ्टवेयर के विभिन्न मॉड्यूल के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसका मुख्य केंद्र संचालन और रखरखाव (O&M) की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। अधिकारियों को सिखाया गया कि कैसे वे डेटा प्रविष्टि, तकनीकी निगरानी और फीडबैक तंत्र को पोर्टल के माध्यम से अधिक प्रभावी बना सकते हैं। इससे जल निगम की परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
सुशासन और प्रभावी निगरानी
राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (NIC), जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत कार्य करता है, ने इस पोर्टल को विकसित और होस्ट किया है। पंचायत दर्पण पोर्टल का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों की रीयल-टाइम निगरानी के लिए किया जा रहा है। जल निगम के अधिकारियों और कम्यूनिटी मोबलाइज़र के प्रशिक्षित होने से ग्रामीण जल प्रदाय योजनाओं के प्रबंधन में तेजी आएगी।
यह आयोजन मध्य प्रदेश राज्य केंद्र द्वारा किया गया, जिसे 'टाइगर स्टेट' के साइबर गेटवे के रूप में जाना जाता है। सरकारी सेवाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण और सुशासन की दिशा में यह सत्र एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। भारत सरकार द्वारा विकसित यह प्रणाली भविष्य में जल प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद करेगी।