भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक है, लेकिन इस साल "Indian Mango Export to Japan" को बड़ा झटका लगा है। जापान ने पेस्ट कंट्रोल प्रक्रिया में कमियां मिलने के कारण भारतीय आमों के आयात पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है,। इससे प्रीमियम आमों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख पर असर पड़ सकता है।
जापान ने क्यों लगाई रोक?
जापान द्वारा भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाने का मुख्य कारण 'पेस्ट कंट्रोल' की प्रक्रिया में पाई गई कमियां हैं। दरअसल, हर साल आम के सीजन में जापानी निरीक्षक भारत आते हैं और 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' (Vapor Heat Treatment - VHT) की जांच करते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें फलों को गर्म हवा वाले चैंबर में रखकर उनके अंदर मौजूद कीड़ों और लार्वा को खत्म किया जाता है। इस साल निरीक्षण के दौरान जापानी अधिकारियों को इस ट्रीटमेंट सुविधा में कुछ गड़बड़ियां मिलीं, जिसके बाद योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने भारतीय आमों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
गुणवत्ता को लेकर जापान की सख्ती
जापान फल-सब्जियों के आयात में गुणवत्ता को लेकर बेहद सख्त माना जाता है। 1970 के दशक में जापान के दक्षिणी हिस्से में फ्रूट फ्लाई (फल पर लगने वाली मक्खी) फैलने से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। इसी कड़वे अनुभव के कारण आज वहां 'ज़ीरो पेस्ट टॉलरेंस' की नीति लागू है। जापान को डर है कि यदि भारत से कीड़े या उनके अंडे वहां पहुंच गए, तो उनकी स्थानीय खेती को बड़ा खतरा हो सकता है।
निर्यात पर कितना होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, मात्रा के लिहाज से यह बैन बहुत बड़ा नहीं है क्योंकि जापान को होने वाला निर्यात भारत के कुल आम निर्यात का 1 प्रतिशत से भी कम है। भारत अपने आमों का सबसे बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (UAE, कुवैत, कतर) और अमेरिका-ब्रिटेन को भेजता है। हालांकि, चिंता की बात 'सिग्नल इफेक्ट' है। जापान जैसे गुणवत्ता के प्रति जागरूक देश द्वारा रोक लगाने से वैश्विक बाजार में भारतीय एक्सपोर्ट सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
खराब मौसम ने भी बढ़ाई मुश्किलें
भारतीय आम उत्पादक पहले ही मौसम की मार झेल रहे हैं। मैंगो ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सर्दियों की अधिक ठंड और फिर अचानक बढ़े तापमान के कारण पैदावार काफी कम हुई है। आंधी-तूफान ने बची हुई फसल को भी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में जापान का यह फैसला प्रीमियम आमों, विशेषकर अलफ़ांसो (Alphonso) के निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जिसे जापानी बाजार में एक 'लग्जरी फल' माना जाता था।