भोपाल के छपरी गांव में बुजुर्ग दंपति बने प्यासों के मसीहा

An elderly couple providing water to villagers from their private borewell in Chhapri village, Bhopal.

भोपाल की छपरी पंचायत में भीषण जल संकट (Water Crisis) के बीच एक बुजुर्ग दंपति मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं। केरवा डैम पाइपलाइन में देरी के कारण जब पूरा गांव बूंद-बूंद पानी को तरस रहा था, तब इस दंपति ने अपने निजी बोरवेल के दरवाजे ग्रामीणों के लिए खोल दिए।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे छपरी गांव में इन दिनों पानी की भारी किल्लत है। प्रशासन द्वारा केरवा डैम से पाइपलाइन बिछाने का काम काफी समय से लंबित है, जिसके कारण ग्रामीणों को दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोकर लाना पड़ता था। चिलचिलाती धूप और गर्मी में पानी का इंतजाम करना गांव वालों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था।

ऐसे कठिन समय में गांव के एक बुजुर्ग दंपति, रामप्रसाद और उनकी पत्नी, ग्रामीणों की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने देखा कि गांव की महिलाएं और बच्चे पानी के लिए भटक रहे हैं, तो उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के अपने घर के निजी बोरवेल से मुफ्त पानी बांटना शुरू कर दिया।

असर और प्रभाव:

आज स्थिति यह है कि सुबह से शाम तक उनके घर पर पानी भरने वालों का तांता लगा रहता है। इस दंपति ने न केवल लोगों की प्यास बुझाई, बल्कि गांव के सामाजिक सद्भाव को भी मजबूत किया है। ग्रामीण बताते हैं कि अगर यह दंपति मदद न करता, तो उन्हें कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता या महंगे दामों पर पानी के टैंकर खरीदने पड़ते।

जहाँ एक ओर सरकारी तंत्र की सुस्ती से पाइपलाइन का काम अटका हुआ है, वहीं इस बुजुर्ग दंपति की पहल ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति हो तो समाज की बड़ी समस्याओं का समाधान आपसी सहयोग से भी निकाला जा सकता है। फिलहाल, ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही केरवा प्रोजेक्ट का काम पूरा करेगा, लेकिन तब तक यह 'मसीहा' दंपति ही उनकी उम्मीद का सहारा है।

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