हरियाणा के पूर्व IAS अधिकारी अशोक खेमका ने दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) की लीज खत्म करने के केंद्र सरकार के फैसले को साहसिक बताया है। उन्होंने कहा कि 10 हजार करोड़ की सार्वजनिक जमीन पर बने इस क्लब के खिलाफ यह कदम जनहित में एक बड़ा फैसला है।
अशोक खेमका ने बताया 'साहसिक कदम'
अपने बेबाक अंदाज के लिए चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए सरकार के इस फैसले का खुले तौर पर समर्थन किया है। खेमका के अनुसार, दिल्ली जिमखाना क्लब राजधानी की बेहद कीमती सार्वजनिक जमीन पर बना हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत 10 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक है,। उन्होंने इस फैसले को सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ करार दिया है।
अमीर और प्रभावशाली वर्ग से विरोध की आशंका
खेमका ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का विरोध होना निश्चित है, क्योंकि क्लब से जुड़े कई प्रभावशाली और 'जमे-जमाए' अमीर लोग लंबे समय से इसके विशेष लाभ लेते रहे हैं,। उन्होंने सरकार की कार्यकुशलता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या मोदी सरकार अपने इस निर्णय पर मजबूती से कायम रहेगी या फिर रसूखदार लोगों के दबाव में आकर पीछे हट जाएगी।
किरण बेदी ने जताया विरोध
जहाँ एक तरफ खेमका सरकार के साथ खड़े हैं, वहीं देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने सरकार के इस कड़े रुख को 'बहुत बुरा और दुखद' बताते हुए इस पर दोबारा विचार करने की उम्मीद जताई है। सरकार का तर्क है कि इस जमीन का उपयोग पूरी तरह पारदर्शी और जनहित के मानदंडों के अनुरूप होना चाहिए।
परिचय : अशोक खेमका
अशोक खेमका 1991 बैच के चर्चित IAS अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने अपनी 34 साल की सेवा के दौरान 57 ट्रांसफर झेले हैं। वे साल 2012 में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी और DFL के बीच हुई लैंड डील के म्यूटेशन को रद्द करने के बाद सुर्खियों में आए थे। खेमका हरियाणा परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से रिटायर हुए हैं।